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आमिर से भिड़ने को तैयार भाई फैजल खान
बॉक्स ऑफिस पर आमिर खान से शायद ही कोई दो-दो हाथ करने की जुर्रत दिखाए. हाल ही में अभिनेता संजय दत्त ने आमिर की फिल्म से क्लैश को टालने के लिए अपनी फिल्म 'भूमि' की रिलीज डेट आगे खिसका दी.
लेकिन ऐसा लगता है कि आमिर खान के छोटे भाई फैजल खान को आमिर के इस स्टेटस की जानकारी नहीं है. शायद इसलिए वो आगामी 4 अगस्त को बॉक्स ऑफिस पर आमिर से भिड़ने को तैयार है. कहीं फैजल के लिए आमिर खान 'घर की मुर्गी दाल बराबर' जैसी हैसियत तो नहीं रखते?
बहरहाल, आमिर खान की फिल्म 'सीक्रेट सुपरस्टार' 4 अगस्त को रिलीज हो रही है. ख़बरों के मुताबिक़ इसी दिन फैसल खान की फिल्म 'डेंजर' भी रिलीज होगी. फैजल खान के मुताबिक पहले इस फिल्म को 3 अगस्त को रिलीज किये जाने का प्लान था जो उनका जन्मदिन भी है. लेकिन पोस्ट प्रोडक्शन में हुई देरी की वजह से इसे आगे खिसकानी पडी. हालांकि वो खुद आमिर की फिल्म से क्लैश नहीं चाहते लेकिन आखिरकार मर्जी इसके निर्माताओं की है.
फिल्म 'डेंजर' एक हॉरर फिल्म है जो एक होटल में घटी वास्तविक घटना पर आधारित है, जहां होटल का निर्दयी मालिक लोगों को मार कर उनका मांस दूसरों को सर्व करता था. फैजल खान फिल्म में गुजरात के स्टॉक ब्रोकर की भूमिका में हैं, जो होटल में अपनी पत्नी के साथ फंस जाते हैं. देखते हैं घर का भेदी आमिर की लंका को कितना नुकसान पहुंचा पाते हैं.
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editor
12:21:17 pm 30 - Mar - 2017
टीवीएफ के अरुणाभ कुमार और फंसे, लड़की ने छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराया
'द वायरल फीवर' (टीवीएफ) के सीईओ अरुणाभ कुमार के खिलाफ मुंबई में छेड़छाड़ का केस दर्ज कर लिया गया है.
खुद को टीवीएफ की पूर्व महिला कर्मी बताने वाली लड़की ने आरोप लगाया था कि टीवीएफ में 2 साल की नौकरी के दौरान कंपनी के सीईओ अरुणाभ कुमार ने उनका शोषण किया. बुधवार शाम आरोप लगाने वाली लड़की ने अंधेरी ईस्ट स्थित एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में जाकर बयान दर्ज कराया.
एक दिन पहले ही पुलिस ने कहा था कि वह आरोपी के सामने न आने पर अरुणाभ के खिलाफ कार्रवाई बंद करने की सोच रही है. पुलिस ने इससे पहले अज्ञात व्यक्ति की शिकायत पर एफआई दर्ज की थी.
अरुणाभ ने अपनी सफाई में पीड़िता पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था. टीवीएफ ने अरुणाभ का समर्थन करते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है.
सोशल मीडिया पर एक लड़की के अरुणाभ पर शोषण का आरोप लगाने के बाद ऐसी दर्जनों लड़कियां सामने आईं थीं जिन्होंने अरुणाभ पर शोषण और बुरे व्यवहार का आरोप लगाया. इनमें से अधिकतर ने गुमनाम तरीके से अपनी बात रखी थी. ऐसे में पुलिस मामला दर्ज नहीं कर पा रही थी.
टीवीएफ के प्रवक्ता ने कहा है कि उन्होंने इस मामले की जांच के लिए एक आंतरिक कमिटी बनाई है. इस जांच समिति में टीवीएफ के भीतर के सदस्यों के साथ-साथ बाहर के भी सदस्य होंगे. मामले की जांच और सुनवाई पूरी हो जाने के बाद टीवीएफ सभी को इसकी जानकारी देगा.
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editor
12:18:26 pm 30 - Mar - 2017
योगी आदित्यनाथ! यूपी के सीएम बनिए दारोगा नहीं...
क्वांटम फिजिक्स में 'अनिश्चितता का सिद्धांत' कहता है कि किसी कण की स्थिति और गति को एकसाथ एकदम ठीक-ठीक नहीं मापा जा सकता. स्थिति जितनी अधिक शुद्धता से मापी जाएगी, उसके संवेग यानी गति को मापने में उतनी ही अशुद्धता बढ़ जाएगी. अब जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पिछले तीन साल में देश की राजनीति में अपनी प्रधान भूमिका को पुख्ता करती जा रही है, विज्ञान का यह सिद्धांत राजनीति पर फिट बैठता दिख रहा है.
चुनाव नतीजों के बाद देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीतिक उथलपुथल को ही देखिए. बीजेपी की अपार जीत के बाद नए सीएम के नाम का सवाल उठ खड़ा हुआ? इस तरह से नाम उछाले और गिराए गए कि भारी अनिश्चितता की स्थिति बनती नजर आई.
यह मानना तो बचकानी बात होगी कि गोरखनाथ पीठ के महंत आदित्यनाथ के नाम का चुनाव अनायास ही कर लिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि अपने आप में ताकतवर और सख्त नेता की है, ऐसे में सोच से परे है कि संघ परिवार या कोई अन्य नेता उन्हें किसी सौदेबाजी के लिए मजबूर कर दें. फिर भी आदित्यनाथ का सीएम बनना सामान्य समझ से तो परे था ही.
मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला हो जाने के बाद भी अनिश्चितता बाकी है. अब यह सामाजिक स्तर पर है. मुख्यमंत्री का हजरतगंज थाने का अचानक निरीक्षण कुछ और नहीं बल्कि यूपी के दारोगा के रूप में दिखने की उनकी चाहत का नजारा थी. दारोगा एक अहम प्रतीक है जो सरकार की ताकत और सर्वव्यापिता का प्रतिनिधित्व करता है.
नतीजा ये है कि राज्य की पूरी पुलिस मशीनरी हदराए हुए घूम रही है. यह देखना अपने आप में दयनीय था कि कैसे सभी शीर्ष पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री को थाने के कामकाज के बारे में समझा रहे थे जबकि अपने भ्रष्ट आचरण के बदनाम उनके जूनियर खड़े ताक रहे थे.
इसमें दोराय नहीं है कि थानों या पुलिस स्टेशनों की हालत में सुधार करने और उन्हें जनता के लिए और मददगार बनाने की जरूरत है. लेकिन सवाल है कि 'क्या इसके लिए यह सही तरीका है?'
इसी तरह हर कोई मानेगा कि पब्लिक प्लेस में बने अवैध बूचड़खानों एक परेशानी थे. बीच बाजार जानवरों की कटाई राज्य में दिखने वाले सबसे वीभत्स दृश्यों में था. राजनीतिक सरपरस्ती के दम पर बूचड़खाने चला रहे लोगों को कई डर-भय नहीं था और वह कानून को ठेंगे पर रखते थे. पश्चिमी यूपी में यह सामाजिक असंतोष का मामला भी था क्योंकि लोगों को लगता था कि इन बूचड़खानों में चोरी कर लाए गए दुधारू पशुओं की कटाई होती है.
लेकिन इन अवैध बूचड़खानों का पूरा ठीकरा पुलिस के सिर फोड़ना सही नहीं होगा. दशकों से इस रैकेट में नागरिक प्रशासन से लेकर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट्स और जानवरों के डॉक्टरों की भी मिलीभगत रही है. इसे सुधारने के लिए दीर्घावधि संस्थागत हल की जरूरत है न कि सिर्फ दिखाने के लिए एक झटके में पुलिसवालों के दम पर जबरन बंदी करा देना.
एक अन्य सामाजिक मुद्दा महिलाओं की सुरक्षा का है. पिछले 5 वर्षों में सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं की जड़ में छेड़छाड़ की ऐसी घटनाएं रही हैं. मुजफ्फरनगर दंगों के पीछे की वजह भी यही रही. लेकिन पार्कों और शॉपिंग मॉल्स में यूपी पुलिस का जो उन्मत व्यवहार अब देखने को मिल रहा है, वह न केवल अशिष्ट बल्कि घृणित भी है.
जिन्हें यूपी पुलिस के बारे थोड़ा भी पता है, वह इस बात की गवाही देंगे कि सिपाहियों और अफसरों को महिलाओं से व्यवहार को लेकर दीर्घकालीन व विस्तृत शैक्षणिक ज्ञान दिए जाने की जरूरत है. ऐसे उदाहरण हैं जहां पुलिस थानों में रेप की घटनाएं हुई हैं. अगर लोकल थानों के दारोगाओं को 'मोरल पुलिसिंग' के लिए ताकत दे दी जाती है तो यह इलाज बीमारी से ज्यादा खतरनाक होगा. आदित्यनाथ ठीक यही कर रहे हैं.
इसमें कोई शक नहीं है कि योगी गलत कारणों से खबरों में रह रहे हैं. विशाल जनादेश के बाद जहां राज्य को स्थिरता और निश्चितता के रास्ते पर बढ़ना चाहिए था लेकिन वह अंधेरी-अनजान गलियों में भटकता दिख रहा है. इसके पीछे वजह योगी का रहस्यमयी राजनीतिक व्यक्तित्व है जो आधुनिक राजसत्ता के बने-बनाए सिद्धांतों के परे दिखता है. वह एक ऐसी शख्सियत हैं जो स्पष्ट रूप से धर्म को फिर से स्थापित करने की बातें करता है. लेकिन वह अब 'आधुनिक व सेकुलर राज्य' के नेता हैं. यह विरोधाभास इतना साफ है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
जाहिर है यह कहना जल्दबाजी होगी कि योगी अनिश्चितता के इस रास्ते पर ही कदम बढ़ाते रहेंगे. संभावना है कि वह अपनी जिम्मेदारियों को समझकर राजनीतिक और सामाजिक संतुलन जल्द बना लें. अगर ऐसा नहीं होता है तो विज्ञान के 'अनिश्चितता के सिद्धांत' का राजनीति में प्रयोग एक सामाजिक 'पागलपन' को जन्म दे सकता है. इसका नतीजा भला नहीं हो सकता.
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editor
12:15:25 pm 30 - Mar - 2017
कोलकाता: होटल में लगी आग, 2 लोगों की मौत
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक होटल में गुरुवार तड़के आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई जबकि छह घायल हो गए.
दमकल विभाग के अधिकारी ने बताया कि आग गोल्डन पार्क होटल के ग्राउंड फ्लोर पर तड़के 2.55 बजे लगी.
उन्होंने बताया, 'हम होटल से 31 लोगों को सकुशल बाहर निकालने में कामयाब रहे. छह घायलों को इलाज के लिए एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया है.'
आग लगने की खबर पता चलते ही दमकल विभाग के 10 वाहन मौके पर पहुंच गए और दो घंटे में आग पर काबू पा लिया.
अधिकारी ने बताया, 'अभी स्थिति नियंत्रण में है. फोरेंसिक जांच के बाद ही आग लगने के कारणों का पता चल सकता है.'
  Report By
editor
12:09:34 pm 30 - Mar - 2017
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